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Showing posts from November, 2018

Fish farming

जाड़े के मौसम में मछलियों में होने वाले बीमारीयों से बचाव कैसे करें।चूँकि मछली एक जलीय जीव है, अतएव उसके जीवन पर आस-पास के वातावरण की बदलती परिस्थतियां बहुत असरदायक हो सकती हैं। मछली के आस-पास का पर्यावरण उसके अनुकूल रहना अत्यंत आवशयक है। जाड़े के दिनों में तालाब की परिस्थति भिन्न हो जाती है तथा तापमान कम होने के कारण मछलियाँ तालाब की तली में ज्यादा समय व्यतीत करती हैं । अत: ऐसी स्थिति में ‘ऐपिजुएटिक अल्सरेटिव सिन्ड्रोम’ (EUS) नामक बीमारी होने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है । इसे लाल चक्ते वाली बीमारी के नाम से भी जाना जाता है । यह भारतीय मेजर कॉर्प के साथ-साथ जंगली अपतृण मछलियों की भी व्यापक रूप से प्रभावित करती है। समय पर उपचार नहीं करने पर कुछ ही दिनों में पूरे पोखर की मछलियाँ संक्रमित हो जाती हैं और बड़े पैमाने पर मछलियाँ तुरंत मरने लगती हैं ।बीमारी का इतिहास।इस रोग का विश्लेषण करने पर यह पाया गया कि प्रारंभिक अवस्था में यह रोग फफूंदी तथा बाद में जीवाणु द्वारा फैलता है । विश्व में सर्वप्रथम यह बीमारी 1988 में बांग्लादेश में पायी गयी थी, वहाँ से भारतवर्ष में आयी ।
इस बीमारी का प्र…

Gav conection

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Gaon Connection
गर्मियों में अगेती किस्म की बेल वाली सब्जियों को मचान विधि से लगाकर किसान अच्छी उपज पा सकते हैं। इनकी नर्सरी तैयार करके इनकी खेती की जा सकती है। पहले इन सब्जियों की पौध तैयार की जाती है और फिर मुख्य खेत में जड़ों को बिना नुकसान पहुंचाये रोपण किया जाता है। इन सब्जियों की पौध तैयार करने  मचान में लौकी, खीरा, करेला जैसी बेल वाली फसलों की खेती की जा सकती है। मचान विधि से खेती करने से कई लाभ हैं। मचान में खेत में बांस या तार का जाल बनाकर सब्जियों की बेल को जमीन से ऊपर पहुंचाया जाता है। मचान का प्रयोग सब्जी उत्पादक बेल वाली सब्जियों को उगाने में करते हैं। मचान के माध्यम से किसान 90 प्रतिशत फसल को खराब होने से बचाया जा सकता है। करेला। मचान की खेती के रूप में सब्जी उत्पादक करेला, लौकी, खीरा, सेम जैसी फसलों की खेती की जा सकती है। बरसात के मौसम में मचान की खेती फल को खराब होने से बचाती है। फसल में यदि कोई रोग लगता है तो तो मचान के माध्यम से दवा छिड़कने में भी आसानी होती है। ये भी पढ़ें- केवीके की मदद से चित्रकूट के किसान कर रहे केले की खेती उद्यान विभाग के शाक सब्जी विभाग के संयुक्त…

बैगन की जानकारी

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बैगनकाजन्मस्थानभारतहैयहसोलेनेसीकुलकापौधाहैंइसकीखेतीसब्जीकेरूपमेंकीजातीहैबैगनकाप्रयोगदवाकेरूपमेंकियाजाताहैसफ़ेदबैगनमदुमेहमेंलाभकारीहै Wednesday, 23 Aug, 9.02 am वैज्ञानिक तरीके से करे बैंगन की खेतीबैंगन की खेती भारत और चीन में ज्यादा की जाती है. ऊंचे पहाड़ि इलाकों को छोड़कर पुरे देश में इसकी खेती की जा सकती है. क्यों की भारत की जलवायु गर्म होती है और ये began ki kheti के लिए उपयुक्त रहती है. बैंगन की बहुत सारी किस्में होती है. में कुछ विशेष किस्मों के बारे में यहाँ पर बताउगा जो hiybird है. और अच्छा उत्पादन देने वाली होती है. 1 पूसा hibird 5 इसमे पौधा बड़ा और अच्छी शाखाओं युक्त होता है. ये फसल 80 से 90 दिनों आ जाती है. प्रति हेक्टेयर 450 से 600 क्विंटल होती है. 2 पूसाhibird 6 गोल फल लगते है. 85 से 90 दिनों की औसत प्रति हेक्टेयर 500 से 600 क्विंटल 3 पूसा hibird 9 85 से 90 दिनों में फल लगते है. औसत 400 से 500 क्विंटल प्रति हेक्टेयर इसके अलावा पूसा क्रांति,पूसा भैरव,पूसा बिंदु,पूसा उत्तम ,पूसा उपकार,पूसा अंकुर, जो की प्रति हेक्टेयर 200 से 400 क्विंटल तक उत्पादन देते है. कैसे करें नर्सरी तैयार न…

गमले में छोटे से पौधे में पाए ढेर सारे नींबू | How to get more lemon from small plant in a Pot Our Green Planet Our Green Planet

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sabhar :our green planet

poly house and organik farming

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sabhar : chuthidunia

polihouse

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